सोमवार, 17 जनवरी 2011

सेवा

सेवा शब्द बड़ा ही विन्रम भाव लिऐ होता है मन्दिर में पुजारी भगवान कि सेवा करता है और कई मन्दिरों में तो पुजारी सेवा को लेकर आपस में लड़ते है भले उन के माँ बाप सेवा के आभाव में इस लोक से गमन कर गये हो - यही सेवा का जज्बा हमारे नेताओं में देश के लिऐ है मैंने सेवा भाव पर  कदम्नी पत्रिका में  एक कहानी कई साल पहले पढ़ी थी लेखक थे राजेन्द्र अवस्थी जी   जो इस प्रकार थी      एक बार भू लोक मै भारी हा हा कार मचा क्योकि देवभूमि पर राक्षसों का राज कायम हो गया था इस राज को कैसे उखाड़ फैका जाय सभी ने विचार किया और विचार ये निकला कि भगवान जो इस समय सो रहे है उन्हें जगाकर इस आफत के बारे में  बताया जाय / भगवान जगे और अपनी शक्ति से राक्षसों को देवभूमि से खदेड़ दिया / चूकि भगवान  सोकर उठे थे सो सेवा को लेकर  अब भक्त आपस में लड़ने लगे / लड़ता देख  भगवान ने कहा आप लोग  एक काम करो कि वोट डाल लो जिसे ज्यदा वोट मिले वही मेरी सेवा पूजा पांच वर्ष तक  करेगा /  सभी सहमत हुए / तभी से जो जीत रहा है वही भगवान कि सेवा पूजा कर रहा है और प्रसादी  खा रहा है  

गुरुवार, 6 जनवरी 2011

फल तो चखना ही पड़े........


हम सभी को एक बात हमेशा याद रखना चाहिए कि जो भावनाए - प्रतिक्रिया चाहे वे सकारात्मक हो या नकारात्मक या हिंसा से भरी हो हम दुसरे के प्रति रखेगे उनका प्रतिफल या यो कहे उस क्रिया का फल हमे जरुर ही चखना पड़ेगा चाहे वक्त कितना ही लगे अब ये हमारे उपर है कि फल को मीठा बनाये या कडवा खाना हम को ही है  / मेरी सोच से तो सारी बुराई कि जड़ हमारा  मुंह है जो फट से किसी बात या व्यक्ति - समाज - देश के वारे में चल जाता है और उस का नतीजा हम तो भोगते ही है आने वाली पीढी भरपाई करती है महाभारत भी द्रोपती के मुंह से कटाक्ष निकलने कारण हुआ  था भाई ...............

मंगलवार, 4 जनवरी 2011

खुशी और ...........

 
शायद खुशी और अहम (अहंकार) सगे भाई बहिन है जब घर में पुत्र जन्म होता है तो भारी उत्सव मनाया जाता है पिता से लेकर दादा परदादा स्वर्ग या नर्क बैठे पित्तर भी खुश हो जाते है और इसी ख़ुशी में हमारा अहंकार छुपा होता है / जब पुत्र की शादी होती है तो घर में चारो तरफ ख़ुशी का माहौल होता है पर इस में असल हमारा अहंकार छुपा होता है प्राय: घर के प्रत्येक सदस्य को शासक का दर्जा प्राप्त हो जाता है / ख़ुशी के उप्लछय--- का नाम देकर जो हम एक से बढ़कर एक दावते गांव के चौपालों  से शहर के पांच सितारा होटलों देते है इस काम में भी अहंकार तुष्ठी छुपी होती है की मैंने .......किया था / जब कोई सरपंच या विधायक - सांसद - मंत्री बनता है तो उन के परिजन मित्र भारी ख़ुशी मनाते है क्योकि अब समाज में उन का अहंकार और प्रवलता से खड़ा होगा

सोमवार, 3 जनवरी 2011

जीवन

 
वर्ष  2010  बीत गया नये वर्ष का स्वागत हो रहा है-- क्या हमारे जीवन एक कदम मौत तरफ और नहीं बढ़ा?? समझ से परे है हम स्वागत किस का कर रहे है जीवन या मृत्यु  का सृजन या विनाश का/ आखिर जीवन है ही कहा जिस क्षण हम सांस लेना शुरू करते है हर सांस हमे मृत्यु निकट ही  तो ले जा रही होती है