गुरुवार, 6 जनवरी 2011

फल तो चखना ही पड़े........


हम सभी को एक बात हमेशा याद रखना चाहिए कि जो भावनाए - प्रतिक्रिया चाहे वे सकारात्मक हो या नकारात्मक या हिंसा से भरी हो हम दुसरे के प्रति रखेगे उनका प्रतिफल या यो कहे उस क्रिया का फल हमे जरुर ही चखना पड़ेगा चाहे वक्त कितना ही लगे अब ये हमारे उपर है कि फल को मीठा बनाये या कडवा खाना हम को ही है  / मेरी सोच से तो सारी बुराई कि जड़ हमारा  मुंह है जो फट से किसी बात या व्यक्ति - समाज - देश के वारे में चल जाता है और उस का नतीजा हम तो भोगते ही है आने वाली पीढी भरपाई करती है महाभारत भी द्रोपती के मुंह से कटाक्ष निकलने कारण हुआ  था भाई ...............

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