बुधवार, 20 अप्रैल 2011

चौपट राजा

मैंने सुना है की हमारी केंद्र सरकार खाना की वर्बादी रोकने हेतु एक कानून बनाने जा रही है/  अच्छी बात है? क्या हमारे नेता हम से मजाक तो नही कर रहे है यदि मजाक नही है तो उन्हें उस अन्न की फ़िक्र करना चाहिए जो प्रति वर्ष खुले  आसमान के तले रखा रहता है और वरसात  के मौसम में सड़ जाता है उसके उचित भंडारण की व्यवस्था करना चाहिए ताकि लाखो लोगो के पेट की भूख हो सके / सरकार की मंशा सार्वजनिक समारोहों के दौरान खाने में केवल एक डिश परोसी जावे / अरे भई एक डिश बने या अनेक आदमी भूखा तो रहेगा नही वह उतना ही खाता है जितनी पेट की क्षमता रहती है / उन फाइव स्टार होटलों का क्या होगा जहा खाना की कीमत प्रति प्लेट से तय होती है वह वन डिश कानून चल पायेगा ? सरकार को लोकपाल बिल तरह ही एक डिशपाल बिल संसद में लाना चाहिए जो सारे देश में वन डिश फार्मूला लागू करेगा देश में कही भी किसी भी शादी समारोह या मत्यु भोज में जाकर जाँच करेगा की कही ज्यादा डिशे तो नही बनी यदि बनी तो खिलाने वाला जेल के अंदर // वैसे गरीब तो वनडिश का पालन जन्मजात करते है कभी खिचड़ी कभी दलिया तो कभी सूखी रोटी // अंधेर नगरी चौपट राजा = टका सेर भाजी टका सेर खाजा // ??????????

गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

भ्रस्टाचार

अन्ना हजारे जी का अनशन एक क्रांति का अंकुरण है / आज की युवा पीढी ने गांधी जी को नही देखा है उन्हे अन्ना हजारे जी के दर्शन जरुर करना चाहिए 

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

मेरी भी कामना

अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए।
जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए।
जिसकी ख़ुशबू से महक जाय पड़ोसी का भी घर
फूल इस क़िस्म का हर सिम्त खिलाया जाए।
आग बहती है यहाँ गंगा में झेलम में भी
कोई बतलाए कहाँ जाके नहाया जाए।
प्यार का ख़ून हुआ क्यों ये समझने के लिए
हर अँधेरे को उजाले में बुलाया जाए।
मेरे दुख-दर्द का तुझ पर हो असर कुछ ऐसा
मैं रहूँ भूखा तो तुझसे भी न खाया जाए।
जिस्म दो होके भी दिल एक हों अपने ऐसे
मेरा आँसु तेरी पलकों से उठाया जाए।
गीत उन्मन है, ग़ज़ल चुप है, रूबाई है दुखी
ऐसे माहौल में ‘नीरज’ को बुलाया जाए।
गोपालदास “नीरज”