एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन अपने गधे पर बैठकर किसी दूसरे शहर
से अपने गाँव आया. लोगों ने
उसे रोककर कहा – “मुल्ला, तुम अपने गधे पर सामने पीठ करके क्यों बैठे हो?” मुल्ला ने कहा – “मैं
यह जानता हूँ कि मैं कहाँ जा रहा हूँ लेकिन मैं यह देखना चाहता हूँ कि मैं कहाँ से आ रहा हूँ.
रविवार, 28 अक्टूबर 2012
शनिवार, 13 अक्टूबर 2012
किस्मत सबकी पलटा खाती है
किस्मत सबकी पलटा खाती है. एक वक़्त ऐसा भी आया कि मुल्ला को खाने के लाले पड़ गए. बहुत सोचने के बाद मुल्ला को लगा कि भीख मांगने से अच्छा पेशा और कोई नहीं हो सकता इसलिए वो शहर के चौक पर खड़ा होकर रोज़ भीख मांगने लगा.
मुल्ला के बेहतर दिनों में उससे जलनेवालों ने जब मुल्ला को भीख मांगते देखा तो उसका मजाक उड़ाने के लिए वे उसके सामने एक सोने का और एक चांदी का सिक्का रखते और मुल्ला से उनमें से कोई एक सिक्का चुनने को कहते. मुल्ला हमेशा चांदी का सिक्का लेकर उनको दुआएं देता और वे मुल्ला की खिल्ली उड़ाते.
मुल्ला का एक चाहनेवाला यह देखकर बहुत हैरान भी होता और दुखी भी. उसने एक दिन मौका पाकर मुल्ला से उसके अजीब व्यवहार का कारण पूछा – “मुल्ला, आप जानते हैं कि सोने के एक सिक्के की कीमत चांदी के कई सिक्कों के बराबर है फिर भी आप अहमकों की तरह हर बार चांदी का सिक्का लेकर अपने दुश्मनों को अपने ऊपर हंसने का मौका क्यों देते हैं.”
“मेरे अज़ीज़ दोस्त” – मुल्ला ने कहा – “मैंने तुम्हें सदा ही समझाया है कि चीज़ें हमेशा वैसी नहीं होतीं जैसी वो दिखती हैं. क्या तुम्हें वाकई ये लगता है कि वे लोग मुझे बेवकूफ साबित कर देते हैं? सोचो, अगर एक बार मैंने उनका सोने का सिक्का कबूल कर लिया तो अगली बार वे मुझे चांदी का सिक्का भी नहीं देंगे. हर बार उन्हें अपने ऊपर हंसने का मौका देकर मैंने चांदी के इतने सिक्के जमा कर लिए हैं कि मुझे अब खाने-पीने की फ़िक्र करने की कोई ज़रुरत नहीं है.”
शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2012
बोलने पर यकीन
एक दिन मुल्ला का एक दोस्त उससे एक-दो दिन के लिए मुल्ला का गधा मांगने के लिए आया. मुल्ला अपने दोस्त को बेहतर जानता था और उसे गधा नहीं देना चाहता था. मुल्ला ने अपने दोस्त से यह बहाना बनाया कि उसका गधा कोई और मांगकर ले गया है. ठीक उसी समय घर के पिछवाड़े में बंधा हुआ मुल्ला का गधा रेंकने लगा.
गधे के रेंकने की आवाज़ सुनकर दोस्त ने मुल्ला पर झूठ बोलने की तोहमत लगा दी.
मुल्ला ने दोस्त से कहा – “मैं तुमसे बात नहीं करना चाहता क्योंकि तुम्हें मेरे से ज्यादा एक गधे के बोलने पर यकीन है.”
बुधवार, 10 अक्टूबर 2012
रिसर्च
मुल्ला नसरूद्दीन के घर में कदम रखते ही एक दिन उसकी बेगम कहने लगी- मियां, मैं एक लम्बे समय से गधों पर रिसर्च कर रही थी। उनके बारे में मुझे एक बहुत ही दिलचस्प बात पता लगी है। वो ये कि वो अपनी गधी के अलावा किसी दूसरी गधी को कभी नहीं देखते।
मुल्ला अपनी बेगम के कहने का आशय भली प्रकार समझ चुका था इसिलए तुरंत बोला- इसीलिए तो वह गधे हैं और आदमी, आदमी।
मुल्ला की हाजिर जवाबी के बाद बेगम का मुंह देखने लायक था।
रविवार, 7 अक्टूबर 2012
शुक्रवार, 31 अगस्त 2012
मित्रों सादर प्रणाम्
आप सभी से अनुपस्थिति लिये क्षमा चाहिता हूँ, आशा है आप क्षमा करेंगे
आप सभी से अनुपस्थिति लिये क्षमा चाहिता हूँ, आशा है आप क्षमा करेंगे
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