एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन अपने गधे पर बैठकर किसी दूसरे शहर
से अपने गाँव आया. लोगों ने
उसे रोककर कहा – “मुल्ला, तुम अपने गधे पर सामने पीठ करके क्यों बैठे हो?” मुल्ला ने कहा – “मैं
यह जानता हूँ कि मैं कहाँ जा रहा हूँ लेकिन मैं यह देखना चाहता हूँ कि मैं कहाँ से आ रहा हूँ.
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