शुक्रवार, 25 मार्च 2011

संन्यास

संन्यासी [ साधू ] होना आज कल फैशन हो गया है या यह कहे की पैसा कमाने का एक सुलभ जरिया हो गया है मठो की आपसी होड़ / संन्यासियों  के सर्वसुविघा युक्त मठ किस दिशा के प्रतीक है / सच्चा  संन्यसी तो हमारे आपके पडोस में ही रहता है जो अपना जीवन परिजनों की सेवा एवम समाजिक दायुत्य पूरा में लगा देता  है / समाज एवम परिजनों से भागा आदमी कभी संन्यसी नही हो सकता /  हाँ ढोगी जरुर हो सकता  है /

सोमवार, 14 मार्च 2011

होली

हर साल की तरह  इस वर्ष भी होली आ रही है /  हम सारी जिन्दगी दूसरो पर अपना रंग जमाने में ही तो लगे रहते है हमे पता होता है हम अंदर से  क्या है ओर बहार से क्या है पर चेहरे पर दूसरा रंग लिए जिए जाते है /  [रंग]  है ही उस  चीज का नाम जो असलियत न दिखने दे /