सोमवार, 14 मार्च 2011

होली

हर साल की तरह  इस वर्ष भी होली आ रही है /  हम सारी जिन्दगी दूसरो पर अपना रंग जमाने में ही तो लगे रहते है हमे पता होता है हम अंदर से  क्या है ओर बहार से क्या है पर चेहरे पर दूसरा रंग लिए जिए जाते है /  [रंग]  है ही उस  चीज का नाम जो असलियत न दिखने दे / 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें