KRISHNA PATERIYA
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सोमवार, 14 मार्च 2011
होली
हर साल की तरह इस वर्ष भी होली आ रही है / हम सारी जिन्दगी दूसरो पर अपना रंग जमाने में ही तो लगे रहते है हमे पता होता है हम अंदर से क्या है ओर बहार से क्या है पर चेहरे पर दूसरा रंग लिए जिए जाते है / [रंग] है ही उस चीज का नाम जो असलियत न दिखने दे /
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