बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

किसान


 हमारे प्रदेश में बड़ा विचित्र समय चल रहा है किसान आत्महत्या कर रहे है राजनेता एक दुसरे के खिलाफ अनशन पर बैठ रहे है किसान आत्महत्या के पीछे हमारी व्यवस्था भी दोसी है हमारे देश में उत्पादक ही अपने उत्पादन कि कीमत तय कर बजार में बेचता है परन्तु किसान के उत्पादन कि कीमत व्यापारी तय करता है ओर व्यापारी वह कीमत तय करता जिसमे उसे ज्यादा से ज्यादा फायदा हो / किसान लाचार जाये तो कहा जाये उसके पास विकल्प ही नही होता / ओर इस सारे झमेले  में छोटे किसान को आत्महत्या के सिवाय दूसरा रास्ता नही बचता है भगवान हमारे राजनेताऔ को जल्द से जल्द सदबुध्धि दे /  यदि वर्ष २०१० -२०११ में जो पैसा भ्रष्ट अधिकारऔ से जप्त हुआ है उसे किसानो में बाट दिया जावे तो प्रदेश का किसान थोडा तो खुशहाल होगा????????

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