KRISHNA PATERIYA
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सोमवार, 15 नवंबर 2010
hello ji
एक दिन फिर गुजर गया सोचा था कोइ शुभ काम करुगा पर नही हो सका वही जिन्दगी के रोने दुसरो को देख सपने बुनना अपनी आत्मा से भी झुट बोलना ये आखिर कब तक देखते हेइ भगवन की क्या मर्जी है शुभ रात्रि
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