सोमवार, 29 नवंबर 2010

shadi

सारे देश मे शादियों कि धूम है अभी दीपावली के बाद ही हमारे देवतागण सो कर जो उठे है / ---------आदमी पैसा कमाता है तो उसे अपने ढ़ग से खर्च करने का  अधिकारी भी है / परन्तु हम सभी समाजिक प्राणी है हमे खर्च करने के अधिकार का उपयोग इस ढंग से करना चहिये कि हमारे पड़ोसी - नगर - समाज पर इस का क्या असर होगा / पैसो कि खनक में यह बात हमारे दिमाग तक नही पुहुच पाती है /

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