सोमवार, 3 जनवरी 2011

जीवन

 
वर्ष  2010  बीत गया नये वर्ष का स्वागत हो रहा है-- क्या हमारे जीवन एक कदम मौत तरफ और नहीं बढ़ा?? समझ से परे है हम स्वागत किस का कर रहे है जीवन या मृत्यु  का सृजन या विनाश का/ आखिर जीवन है ही कहा जिस क्षण हम सांस लेना शुरू करते है हर सांस हमे मृत्यु निकट ही  तो ले जा रही होती है

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपने सही कहा है ...स्वागत किस का कर रहे हैं ....हमारी जिन्दगी का प्रत्येक क्षण ..मृत्यु की तरफ बढ़ रहा है ..यह जिन्दगी की वास्तविकता है ...आपने इस तरफ ध्यान दिलाया आपका आभार ...शुक्रिया

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  2. आपकी प्रत्येक पोस्ट विचारणीय है ..इनको बुक मार्क कर लिया है ..इत्मिनान से पढूंगा ...शुक्रिया

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  3. कृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...
    वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
    डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो करें ..सेव करें ..बस हो गया

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