मंगलवार, 4 जनवरी 2011

खुशी और ...........

 
शायद खुशी और अहम (अहंकार) सगे भाई बहिन है जब घर में पुत्र जन्म होता है तो भारी उत्सव मनाया जाता है पिता से लेकर दादा परदादा स्वर्ग या नर्क बैठे पित्तर भी खुश हो जाते है और इसी ख़ुशी में हमारा अहंकार छुपा होता है / जब पुत्र की शादी होती है तो घर में चारो तरफ ख़ुशी का माहौल होता है पर इस में असल हमारा अहंकार छुपा होता है प्राय: घर के प्रत्येक सदस्य को शासक का दर्जा प्राप्त हो जाता है / ख़ुशी के उप्लछय--- का नाम देकर जो हम एक से बढ़कर एक दावते गांव के चौपालों  से शहर के पांच सितारा होटलों देते है इस काम में भी अहंकार तुष्ठी छुपी होती है की मैंने .......किया था / जब कोई सरपंच या विधायक - सांसद - मंत्री बनता है तो उन के परिजन मित्र भारी ख़ुशी मनाते है क्योकि अब समाज में उन का अहंकार और प्रवलता से खड़ा होगा

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