दिमाग मै एक उलझन हमेशा बनी रहती है की सही क्या है और गलत क्या है जिस के विचारो का
समर्थन ना करो वही गलत कहता है जबकि हमे अच्छी तरह से पता होता है वह क्या चाहिता है और हम क्या चाहते है पागलपन ही अच्छा होता है कम से कम आदमी दिल खोल कर सच तो बोलता है पर हम उसे पगला कह कर चुप करा देते है अहंकार की तुष्टि हेतु हम किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाते है मै सर्वक्षेष्ट तू कुछ नही इसी भावना को हम सब ने अपना लिया है

... bahut sundar ... aadhyaatmik abhivyakti !!!
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